पारसनाथ पहाड़ी | Parasnath Hills | Giridih Ki Shaan

झारखण्ड में अनेक पहाड़-पर्वत तथा खनिज-खदानों से भरा पड़ा है। इसके अलावा यहाँ एक से बढ़कर एक अछूते रमणीय स्थल भी मौजूद हैं, जो की पर्यटन के लिहाज से अब तक ज्यादा विकसित नहीं हो पाएं हैं। 

आप कल्पना करें कि अपने ही इस प्यारा सा राज्य झारखण्ड में अगर एक ऐसी जगह हो, जहाँ दिन के भरे दुपहरिया में भी बादल पर्वतों को छूते नजर आते हों और शाम ढलते ही बरसकर सारी फ़िज़ा - वादियां को तरो-ताज़ा बना दे। 

पारसनाथ की पहाड़ी | Parasnath Hills | Giridih Ki Shaan , Ranchi Talk, #ranchitalk,
पारसनाथ की पहाड़ी | Parasnath Hills | Giridih Ki Shaan 


तो फिर क्या दार्जिलिंग (Darjeeling) और क्या शिमला (Shimla) सब पर्यटक (Tourist) इधर ही खींचे चले आएंगे। जी हां हम बात कर रहे हैं झारखण्ड  के सबसे ऊंची चोटी पारसनाथ पहाड़ी ( Parasnath Hills ) की जो बहुत ही सुंदर और सैलानियों के बीच बहुत ही लोकप्रिय भी है।

तो चलिए आज के इस Article में हम आपको बताते हैं - झारखण्ड की बहुत ही प्रसिद्ध पहाड़ी के बारे में  जिसका नाम है - पारसनाथ। पारसनाथ क्यों प्रसिद्ध है ?, पारसनाथ  का नामकरण कैसे  हुआ  ?, पारसनाथ कहां पर स्थित है ?, पारसनाथ कैसे पहुंचे ?, पारसनाथ  के मंदिरों के बारे में रोचक जानकारियाँ , तथा इसके साथ - साथ अन्य बहुत सारी विस्तृत जानकारियां आपसे साझा करेंगे, जिन्हे जानकर आप भी रोमांचित हो उठेंगे ।

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पारसनाथ की पहाड़ी क्यों प्रसिद्ध है | Why is the Hill of  Parasnath Famous ?

झारखंड के सबसे प्रसिद्ध और ऊँची चोटी पारसनाथ की पहाड़ी ( Parasnath Hill ) जो कि गिरिडीह जिले में स्थित है। ये झारखंड के सबसे ऊंची चोटी है, इसी के कारण पारसनाथ की पहाड़ी ( Parasnath Hill ) को भारत के प्रमुख पहाड़ों में इसकी गणना की जाती है। 

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पारसनाथ की पहाड़ी | Parasnath Hills | Giridih Ki Shaan 

पारसनाथ पहाड़ को एक Hill Station के तौर भी जाना जाता है, क्योंकि ये बहुत ही ऊंचा और साथ ही बहुत ही आकर्षक है। अगर आप जुलाई - अगस्त यानि बारिश के महीनों में आयेंगे तो आपको बिल्कुल अलग ही महसूस होगा। ऐसा प्रतीत होगा जैसे आप किसी Hill Station पर घूमने ए हों।

   

पारसनाथ की खासियत यह है कि ये इलका आने के बाद आपको बिल्कुल तनिक भी आभास नहीं होगा कि आप फ़िलहाल झारखंड के गिरीडीह ज़िला में हैं , क्योंकि यह एक हिमालयी पहाड़ी क्षेत्र जैसा दिखता है।

  • Sita Falls | सीता जलप्रपात - Ranchi ki Shaan
  • इस पहाड़ी के चारों ओर का क्षेत्र घने-घने पेड़-पौधों से घिरा हुआ है और इसके चोटी तक जाने के लिए सिर्फ एक छोटा सा पैदल चलने का रास्ता है। वैसे तो पहाड़ के चारों तरफ से जंगली रास्ता है लेकिन सबके लिए उसमें चल पाना संभव नहीं है। उन रास्तों में अनेक जंगली जानवरों से भी सामना हो सकता है ।

    पारसनाथ की पहाड़ी ( Parasnath Hill ) कहां पर स्थित है ?

    पारसनाथ की पहाड़ी भारत के एक सुंदर और खनिज सम्पदाओं से परिपूर्ण एवं पर्यटन की दृश्टि से धनी राज्य  झारखण्ड के पूर्वी छोटानागपुर पठार में स्थित है ,जो झारखण्ड के गिरिडीह जिले में स्थित है। राजधानी राँची से गिरिडीह की दुरी लगभग 155 Km है। 

    पारसनाथ की पहाड़ी ( Parasnath Hill ) कैसे पहुंचें ?

    यहाँ तक पहुँचने के बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं ,आप इनमें से किसी भी माध्यम का चुनाव गिरिडीह तक पहुँचने के लिए कर सकते हैं। आप गिरिडीह झारखण्ड तथा बिहार किसी भी रास्ते पहुँच सकते हैं। 

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    By Air ✈️:-
     

     Nearest Airport

    • Birsa Munda International Airport, Ranchi - 155 kilometres (96 mi)
    • Gaya Airport, Gaya - 169 kilometres (105 mi)
    • Lok Nayak Jayaprakash Airport, Patna - 223 kilometres (139 mi)
    • Netaji Subhas Chandra Bose International Airport, Kolkata - 309 kilometres (192 mi)

    पारसनाथ से निकटतम हवाई अड्डा बिरसा मुंडा हवाई अड्डा है दूरी लगभग 155 किलोमीटर तथा धनबाद हवाई अड्डा की दूरी 50 KM है।

    By Train🚉 :- 

    Nearest Railway Station -  

    • Parasnath Railway Station - 25 kilometres
    • Giridih Railway Station - 39 kilometres

                                पारसनाथ रेलवे स्टेशन से दुरी लगभग 25 KM तथा गिरीडीह रेलवे स्टेशन से लगभग 39 KM है। 

    By Bus 🚌:- 

    Nearest Bus Stand -  

    • Giridih Bus Stand - 39 kilometres
    • Dhanbad, Bokaro, Hazaribagh, Deoghar, Asansol, Durgapur, Kolkata, Howrah, Patna, Ranchi, Jamshedpur से भी लगातार बस मिल जाएँगी /

    गिरीडीह बस स्टैंड से 39 की दूरी पर है KM है।

     पारसनाथ पहाड़ (Parasnath Hill) की ऊंचाई कितनी है ?

    ये पहाड़ झारखंड की सबसे ऊंची चोटी है जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 4500 ft. (1350 metres) है। 

    पारसनाथ का नामकरण कैसे हुआ ?

    इस जगह पर जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर "पार्श्वनाथ" जिन्होंने यहां पर आकर अपनी अंतिम समाधि लिए थे। कुछ हज़ार साल पहले यहां पर जैन धर्म के 24 गुरुओं में से 20 गुरुओं ने यहां पर आकर अपनी अंतिम समाधि लिए और मोक्ष की प्राप्ति हुए। जिसके कारण ही इस पहाड़ का नाम "पारसनाथ" पड़ा। तब से ये मनोरम जगह "पारसनाथ" के नाम से प्रसिद्ध हुआ। 

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    इस पर्वत शिखर पर कुल 24 मंदिर हैं जो सभी तीर्थांकरों को समर्पित है। इसकी तलहटी पर बसा गांव का नाम है "मधुवन", यहीं से पारसनाथ पहाड़ की चढ़ाई शुरू होती है।

    पारसनाथ जैन धर्म के लिए क्यों प्रसिद्ध है ?

    यहां पर जैन धर्म के सबसे पहले तीर्थंकर ऋषभ मुनि और 24वें एवं अंतिम महावीर। सभी यहां आते रहते थे। यही कारण है कि पारसनाथ जैन धर्मावलंबियों के पूरे देश का सबसे बड़े तीर्थ स्थलों में से एक है। जैन धर्मावलंबियों का यहाँ आने का ताँता लगा रहता है।

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     नीचे से ऊपर चढ़ने के लिए आपको रास्ते भर बहुत सारे जैन मंदिरों की लम्बी फेहरिस्त देखने को मिलेगी , जिनमें से हर एक मंदिर का अलग - अलग खासियत है। ये जैन धर्मावलंबियों के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थल हैं , जहाँ पर देश के कोने-कोने से जैन धर्म के अनुयायी अपने तीर्थंकरों का दर्शन करने आते हैं।

     

    पारसनाथ की पहाड़ी (Parasnath Hill) आते हैं तो कहां पर ठहरें ?

    यहां पर अनेक जैन धर्मशालाएं मौजूद हैं, जैसे - श्वेताम्बर सोसाइटी, दिगंबर सोसाइटी  आदि। जो काफी कम दामों में उपलब्ध हैं। परन्तु ये धर्मशालाएं सिर्फ जैन धर्मावलंबियों के लिए उपलब्ध है। यहां पर अन्य Private Hostels तथा Govt Lodge भी मौजूद हैं, जैसे- Hotel Sapna & Yatri Niwas आदि।

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     इस जगह में ज्यादातर होटल जैन धर्मावलंबियों के हैं , जिस करण ये लगभग रात 8 बजे तक ही खुले रहते हैं। सिर्फ़ एक - दो ही ऐसे Hotels हैं जो रात 10 बजे तक खुले हुवे रहते हैं । 

    पहाड़ी पर चढ़ने के लिए कितनी दूरी का सफ़र करना होता है ?

    जैन समुदाय वाले जितने भी लोग यहाँ पर आते हैं सारे लोग समूचे पर्वत को लांघने में कुल 27 KM की दुरी तय करते हैं, क्योंकि वे सभी मंदिरों पर जाते हैं। 

     इनमें से सबसे पहला शिखरजी मंदिर  जो कि 9 KM  में स्थित है,  दूसरा फिर इससे 9 KM  ऊपर ऐसा करते-करते वे एक चोटी से दूसरी छोटी तक कुल 31 मंदिरों  या टोंकों  का दर्शन करने में लग जाता है।

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    वैसे तो पहाड़ चढ़ने के लिए विभिन्न दरों (Rate) पर डोलीवाले लोग भी उपलब्ध रहते हैं, जो आपको कुर्सी वाले डोली में ढोकर ऊपर उठा देंगे। जिसका ऊपर चढ़ने में कुछ दिक्कत होती है वे इनका  सहारा लेते हैं ज्यादातर बूढ़े-बुजुर्ग ही उनका इस्तेमाल करते हैं। 

    कुर्सी डोलीवाले का Rate :- ₹3000 से ₹6000 तक 

    अगर आपके पास कोई मोटरसाइकिल या स्कुटी हो तो आपको 17 KM घूम के चढ़ना पड़ेगा। अगर आप पैदल चढ़ाई करते हैं तो सिर्फ़ 5 KM सीधे Tracking करके जाना पड़ेगा। मोटरसाइकिल वालों के लिए एक स्थान पर आकर सीढियां शुरू हो जाती है। यहां पर जगह-जगह थक कर बैठने के लिए विश्रामालय बनाए गए हैं।

    यहां की एक खासियत यह है कि जो भी इस पहाड़ पर चढ़ता है उसे थकान महसूस ही नहीं होता है। चढ़ते समय आपको जगह - जगह रास्ते पर लिखा हुआ दिखेगा - खाली पैर चलें, अच्छा रहेगा ! 

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    आप जैसे - जैसे ऊपर की ओर चढ़ते जाएंगे अपको तरह - तरह के पेड़ - पौधे देखेंगे। 5 किलोमीटर  चलने के बाद आपको गन्धर्व नाला  मिलेगा, जिसमें आप हाथ-पैर धोकर तरोताज़ा होकर थोड़ा आराम कर सकते हैं। 

    इसके बाद आपको सीढ़ीनूमा रास्ता पर चलना होगा, 7 किमी  पर शीतल नाला  मिलेगा जिसके शीतल जल को स्पर्श करते ही आपके पूरे शरीर को शिथिल कर देगा। 

    सावधान :- रास्ते में आपको कुछ बंदरों के समूह भी दिखाई देंगे , उनको छेड़छाड़ न करें अन्यथा आप पर वे सारे हमला कर सकते हैं। 

    यहां पर एक विशाल Helipad तथा एक Mobile Tower  भी लगाया गया है, जिससे किसी तीर्थ यात्री को Network Problem नहीं होगी। Helipad सिर्फ और सिर्फ VVIP लोगों के लिए बनाया गया है। जैसे - राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, राज्यपाल तथा मुख्य्मंत्री 

    पारसनाथ में स्थित मंदिरों के बारे में विस्तार से वर्णन - 

    यहां के सबसे पुराने मंदिर जो लगभग 1775 ई• में बनी थी ऐसा मंदिर में लिखा हुआ है, जिसके कारण इसे जैनियों का सबसे पुराना मंदिर भी कहा जाता है। जैन धर्मावलंबियों इस मंदिर को ‘बगीचा मंदिर ‘ भी कहते हैं।

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    किवदंती के अनुसार यहाँ पर स्थित कुछ मंदिर क़रीब 2000 साल से भी अधिक पुराने हैं। यहां पर भगवान पार्श्वनाथ की 1008 मूर्तियां  भी हैं तथा इसके अलावा इस परिसर में 1008 भगवान बाहुबली का मंदिर  भी है। 

    सबसे पीछे नंदेश्वर द्वीप मंदिर  है जिसमें पंचमेरण  स्तित है, मूल मंदिर से बाहर निकलते ही 52 फिट ऊंचा विशाल स्तंभ  है तथा इसके समीप ही समोसन मंदिर  बना है।

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    यहां पूजा - अर्चना के लिए शास्त्रीय पद्धति से बना भव्य मंदिर है जिसमें भगवान पारसनाथ का मूर्ति  है। इसके अलावा पद्मावती मंदिर तथा गुरु के दो कमल मंदिर  भी है।

    •  मुख्य मंदिर के दक्षिण भाग में 5 मंदिर हैं गोर, पार्श्वनाथ, गोरखनाथ, स्वामी गन्धर्व एवं चिंतामणि पार्श्वनाथ की प्रतिमाएं स्थापित है। यहीं पर संवेद शिखर पट्टा है , जिसके नीचे जैन धर्म के 20 तीर्थांकरों के चरण चिन्ह को  स्थापित किए गए हैं, जो तीर्थंकार 20 मंदिरों तक नहीं जा पाते हैं वे इन्हीं चरणों का दर्शन कर पुण्य को प्राप्त करते हैं।
    • फिर शुरु होता है मूल मंदिर के उत्तर भाग में स्थित मंदिरों  का जिसमें जल मंदिर  सबसे अंत में स्थित है, इस मंदिर में सांवलीय पारसनाथ की मूर्ति  स्थापित है।
    • इस जगह पर भुमिय जी जागृत मंदिर  है , जहां पर आकर कोई भी भक्तगण अपनी श्रद्धा भक्ति से जो भी मन्नत मांगते हैं तो उसकी इच्छा अवश्य ही पुरी होती है।
    • इनकी पूजा जैन तथा बाकि धर्म के लोग भी करते हैं। इस मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर ही भक्तजन अपनी शिखर यात्रा  को शुरु करते हैं। ऐसा मान्यता है कि - यहां प्रसाद चढ़ाकर शिखर यात्रा करने से यात्रा निर्विघ्न संपन्न होती है।
    • भगवान भुमिय जी  को अन्य धर्म के लोग चमत्कारी बाबा  भी कहते हैं,  ये कभी - कभी आपने भक्त जनों को प्रत्यक्ष ही चमत्कार दिखाते हैं। शाम होते ही बाबा के दरबार में भक्तों की भीड़ लग जाती है, कर्णप्रिय भजनों से मन तृप्त हो जाती है।
    • मूल मंदिर के निचले हिस्से में अरिहंत परमात्मा की मंदिर  स्थापित है जिसके चारों तरफ 20 तीर्थांकरों के साथ अन्य धर्म के देवी - देवताओं के प्रतिमाएं भी स्थापित है।
    • मुख्य मंदिर के उपरी भाग पर 108 पारसनाथ की मूर्ती  तथा अन्य भगवानों की प्रतिमाएं भी विराजमान है।

    दरअसल यह एक व्यवस्था है जिसमें जैन धर्म के तीर्थांकर लोगों को प्रवचन दिया करते थे। ये एक गोलाकार संरचना  है जिसके सबसे ऊपरी भाग के मध्य में एक अशोक वृक्ष  की रचना की गई है, सबसे निचले तल पर चांदी का काम होता है, मध्य भाग में सोने का  एवं सबसे ऊपरी भाग में हीरे-जवारात का  काम होता है।

    इस क्षेत्र में और क्या-क्या विकसित होना चाहिए ?

    Jharkhand Tourism Development Corporation ( JTDC ) ने इसे अभी तक ठीक ढंग से विकसित नहीं किया है। झारखंड सरकार अगर इस जगह को ध्यान में रखकर अच्छे तरीके से विकसित करे, तो यहां पर आने वाले पर्यटकों को और भी अपने ओर आकर्षित करेगा।

    जिससे झारखंड सरकार को भी पर्यटकों से आने वाले Tax से बहुत ही Help होगा और इसी पैसा को इस्तेमाल करके इस जगह को और भी बेहतर बनाया जा सकता है। जैसे :- जगह - जगह पर First Aids Facilities, ट्रॉली झूला , बैठने की व्यवस्था, शुद्ध पीने का पानी, पूरे रास्ता भर 24*7 Light Facilities Available रहना चाहिए आदि।

    समोशरण मंदिर और भोमिया जी मंदिर जो बेहद प्रसिद्ध है :-

    अप्रैल के बैसाखी पूर्णिमा वाले रात को प्रति वर्ष यहां के स्थानीय संथाल आदिवासी  यहां पर आकर शिकार उत्सव भी मनाते हैं। ये उत्सव आदिवासियों के लिए बेहद ही ख़ास होता है, इस दिन सभी कोई अपने - अपने अनुसार रिज - रंग में वैभोर हुए रहते हैं।

    इसके अलावा यहाँ पर जैन धर्म से जुड़े कई मंदिर स्थित भी है, जो आधुनिक रूप से बनाए गए हैं। समोशरण मंदिर व भोमिया जी का मंदिर  यहाँ पर काफी प्रसिद्ध है। 

    पारसनाथ में जैन म्यूज़ियम भी बनाया गया है :-

    मधुवन हाउस  में स्थित "जैन म्यूज़ियम" जिसमें आप जैन धर्म से जुड़ी कई तरह की मूर्तियाँ, पांडुलिपी आदि भी देख सकते हैं। इस म्यूज़ियम में स्थित टेलीस्कोप की सहायता से आप पारसनाथ मंदिर को बिलकुल स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। 

    इस जगह से 3-4 KM की दूरी पर बहने वाली गन्धर्व नदी तथा सीता नदी भी इस स्थान की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। जैन तीर्थयात्री "गन्धर्व नदी से लेकर श्री सम्मेता जी" तक के मार्ग को बेहद पवित्र स्थल मानते हैं।

    पारसनाथ की पहाड़ी (Parasnath Hill) चढ़ाई करने से पहले इन बातों को जरुर जानें - 

    • आप ऊपर चढ़ाई करने से पहले नीचे से ही खाने - पीने की आवश्यक सामग्रीयां।  जैसे - पीने का पानी, केला, सेव, बिस्कुट आदि पकड़ लें।
    • यहाँ पर अकेले जाने से बचें, हमेशा एक समूह में जाएं।
    • यात्रा का सबसे सुरक्षित समय सुबह 5 बजे से शाम 6 बजे के बीच है।
    • Nature Adventures & Tracking के लिए ये काफ़ी अच्छी जगह है।
    • आपने साथ एक बड़ा डंडा लेके ही चढ़ें ताकि इससे आपको चलने आसनी होगी। किसी दूसरे काम में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

    पारसनाथ की पहाड़ी (Parasnath Hill) जैसे अन्य पर्यटन स्थलों के नाम- 

    निष्कर्ष :- 

    आज इस Article में  हमने विस्तार से बताया की  - पारसनाथ क्यों प्रसिद्ध है ?, पारसनाथ  का नामकरण कैसे  हुआ  ?, पारसनाथ कहां पर स्थित है ?, पारसनाथ कैसे पहुंचे ?, पारसनाथ  के मंदिरों के बारे में रोचक जानकारियाँ  तथा इसके अलावे अनेकों जानकारियां जो आपके लिए लाभदायक साबित होंगी। 

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    HemanT

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